हम कईसय होइगयन अछुत

✍️ रामशरण रैदास

हम कैसे होइगयन अछुत

कुछ सम्झमे नई अवत हाय ।
वाप दादा खुब मेहनाती रहे,
बन्जर जमिन मे फसल फरावत रहे
पशुवन सेवा हमारे करी,
उपजनी सव बाबुवा लोग रखत है ।।
गाउवा कय सव शुभकाम में
हमारे हि गोहरावे से होत है काम ।
सारा काम बनै बाबूकाय होय नाम,
बिगड जाय तब हमही होइ बदनाम

हम कैसे होइगयन अछुत
कुछ सम्झमे नई अवत हाय ।
पत्थर छिनी मूर्ति हमारे बनाई ।
पुजारी जी टिका लगाई देय
हम तो भितारो जायक न पाई
मरल पशु के चमडा निकली,
ढोल बानी पुजा घर मे बाजी
चन्दा उठावेंक हमलोग आये,
पुजा मे पन्डल के बाहर भि नबोलावै ।।

हम कैसे होइगयन अछुत
कुछ सम्झमे नई अवत हाय
हर, हसियाँ, खुर्पी
कुदरा सब हमारे बनाई
बडा बडकवा के मेहरारुन के
बच्चों हमारे माई जाइ जन्मवाईन
नपाख दिन समय तक माई खुब
बच्चा और अम्मा कय सेवा करिन
छटटी बरही करेक समय हि
घरहू मे नई जायक पाइन ।।

हम कैसे होइगयन अछुत
कुछ सम्झमे नई अवत हाय
किसानी और पशु कय जानकार
हमारे, हथिहार बनावेंक हमारे जानी
हमारे बनावल औजार सामाग्री कय बिना
होत नई कौनो शुभ काम
पण्डित जी पत्थर मुर्तिकय भोग लगावें,
घर घर से चन्दा माँगावों
हमारे मेहनत हमारे दान,
हमारे हि मतदान से रहय मतवान । ।

हम कैसे होइगयन अछुत
कुछ सम्झमे नई अवत हाय ।
गाउँके सुरक्षा हमारे कारी,
माई करे बच्चा और अम्मा कय स्याहार
जे नाइ करिश कुछ वही पायगय सव कुछ ।
हमारे करेन सब कुछ, हमारे होइगयन अछुत । ।
लेखक सव बहुजन से यहि कहै
जागौं भाई करों विचार
अब नई ऐसन होइ काम,
न होई एसन दान और मतदान
हम कैसे होइगयन अछुत
कुछ सम्झमे नई अवतहाय ।

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